तुम्हारी तस्वीर, प्रेम पर लिखे शेर,
काग़ज़, ज़ज्बात, समय, स्याही सब अर्थहीन हो गए
जब से गुलाब पर काँटों की कटुता और
तुम पर बेवफ़ाई के आरोप संगीन हो गए।
- मिक्की चौधरी
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