एकतरफ़ा दोनों का

जुदा रस्ते ख़फ़ा दोनों, रह गया मलाल था 

सुर्ख आँखे लाल जैसे, उड़ गया सब गुलाल था। 


कशमकश ने बांधा एक पहर, 

वक़्त बिता इतना जैसे सारी उमर

टीस थी छोटी सही पर थी लहर,

हर ख्वाहिश की ख्वाहिश निगला वो भंवर

सब तोड़ता, झकझोरता, बिखेरता वो भूचाल था। 

जुदा रस्ते ख़फ़ा दोनों, रह गया मलाल था

सुर्ख आँखे लाल जैसे, उड़ गया सब गुलाल था। 


समर्पण प्याला दोनों को दोनों ने कुछ यूँ पिलाया

जुबाँ तड़पते मरे और शब्दों को दिल मे दफनाया

जरा सी आह ली फिर यादों को चिता पर लिटाया 

अपने हिस्से का एकतरफ़ा बड़ी सिद्दत से निभाया 

पहाड़ सी शांति बाहर, अंदर भरा बवाल था। 

जुदा रस्ते ख़फ़ा दोनों, रह गया मलाल था

सुर्ख आँखे लाल जैसे, उड़ गया सब गुलाल था। 


दोनों घूमे साथ - साथ अलग होने को 

सब छोड़ दिया दर्द दावानल मे सुलग जाने को 

फिर ना मुड़े वो ना ही पलटे एक दूजे के सम्मान से 

सब छोड़ा भविष्य पर, बन गए अंजान से

अपना अपना हक समेटा, जो था ही बस ख्याल था। 

जुदा रस्ते ख़फ़ा दोनों, रह गया मलाल था

सुर्ख आँखे लाल जैसे, उड़ गया सब गुलाल था।

                                                - मिक्की चौधरी 




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