सारांश

 पसीने से लथपथ, वातानुकूलित कक्ष मे बैठ

सब अपने हिस्से का सारांश रच रहे हैं।

हरे पौधे, मरियल कुत्ते, भूरी मकड़ियां

सब अपना सारांश रचने मे व्यस्त हैं।

काली पन्नियों वाली झोंपड़ी या फिर सफेद संगमरमर का महल

सारांश मे इनका स्थान नगण्य है।


कोई कह रहा था लहलहाते पीले सरसों का सारांश सबसे उत्तम है 

कोई नागफनी के सारांश का महिमामंडन कर रहा था।

नीचे गिरे जामुन कोई बिना धोए खा रहा था

कोई प्लेट मे सजी गुलाबजामुन पचा नहीं पा रहा था।

दोनों अपना अपना सारांश लम्बा करने की जुगत मे थे....


सारांश बड़ा करने की पुरज़ोर कोशिश करते हैं सब

सड़कों से, जमीन से, धन से, जनसंख्या से।

सब चाहते हैं अधिक से अधिक घटनाओं का हिस्सा बनना

जो घटित होनी बाकी भी हैं उस दुर्घटना से अपना सारांश बड़ा करना।


जीवन का संघर्ष शुरू से शुरू है........ 

बाघ बकरी से डरता आया है और बकरी पौधे से डरती रही है 

एक समांतर दुनिया मे।

कोई सृजन का पोषक और समर्थक बना रहा है

किसी ने ब्रम्हाण्ड को दोनों हथेलियों से दबा कर फोड़ना चाहा।


सारांश की अपनी अलग मज़बूरी है कि उसे संक्षिप्त रहना है।

सड़क कितनी भी लंबी हो, पड़ाव उसका सारांश है।


सारांश सत्य है, अंत तक बचते हुए 

सारांश प्रकृति है, सबकुछ समेटे हुए

सारांश मृत्यु है, हर सृजन के लिए।   

                                                 - मिक्की चौधरी 

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