बाल कविता

आओ मेरे बच्चे तेरा चूम लूँ माथा,

सुनाऊँ अपने भारत की महागाथा।


प्रकृति के श्रृंगार से सजीधजी धरा, 

चहुँ बिखरे रंग लाल, पीला, नीला और हरा।

यह वैभव, सुख, शांति हड़पने आए विदेशी, 

परतंत्रता की बेड़ियों मे हमारे वतन को जकड़ा। 

विषाद मे भी हर तरफ जो प्यार लुटाता

सुनाऊँ अपने भारत की महागाथा।

आओ मेरे बच्चे तेरा................ 


ज़ुल्म की जब हो गई इन्तेहा प्यारे, वतन के लाल उठ खड़े हुए सारे। 

प्राणाहुति दे छीनी आजादी, गूंजे फिर से भारत माँ की जय के नारे। 

मस्तक पर मुकुट बन जिसके गिरिराज शोभता

सुनाऊँ अपने भारत की महागाथा।

आओ मेरे बच्चे तेरा...................


हर मुश्किलों से लड़कर भी हम अडिग रहे हरदम

विश्व मे नेतृत्वकर्ता बन इतिहास रच दिया।

अन्वेषण, कंप्युटर, डिजिटल दुनिया मे बुलन्द कर परचम

चांद पर पानी खोज नव आयाम गढ़ दिया।

दक्षिण मे पैर जिसके सागर पखारता

सुनाऊँ अपने भारत की महागाथा।

आओ मेरे बच्चे तेरा.................


अभी तो तय किया है हमने थोड़ा फासला,

सोने की चिड़िया को फिर से सजाना है।

माना रास्ता लंबा पर न रुकेगा क़ाफ़िला,

भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है।

अहिंसा परमो धर्मः का जो पाठ पढ़ाता 

सुनाऊँ अपने भारत की महागाथा।

आओ मेरे बच्चे तेरा................


आओ मेरे बच्चे तेरा चूम लूँ माथा,

सुनाऊँ अपने भारत की महागाथा ।


                                             - मिक्की कुमार चौधरी 

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